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- वैसे तो श्रावण का पूरा मास ही अपने आप में अद्भुत फलदायी है परन्तु नीचे कुछ तिथियाँ विशेष हैं
श्रावण प्रारंभ: 23 जुलाई 2013, दिन मंगलवार
श्रावण का प्रथम सोमवार: 29 जुलाई 2013
श्रावण का प्रदोष 04 अगस्त 2013
श्रावण का द्वितीय सोमवार और शिवरात्रि 05 अगस्त 2013
... नागपंचमी 11 अगस्त 2013
श्रावण का तृतीय सोमवार: 12 अगस्त 2013
श्रावण का चतुर्थ सोमवार और प्रदोष : 19 अगस्त 2013
श्रावण अंत: 21 अगस्त 2013
Sawan Somwar Vrat : - ( श्रावण सोमवार व्रत ) -
23 July (Tuesday) - श्रावण प्रारंभ
29 July (Monday) - श्रावण सोमवार व्रत
05 August (Monday) - श्रावण सोमवार व्रत
12 August (Monday) --श्रावण सोमवार व्रत
19 August (Monday) - श्रावण सोमवार व्रत
21 August (Wednesday) - Last day of Shravana Month
ज्योतिष कोई परमात्मा नहीं यह आपका मार्ग दर्शक है
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व्यक्ति जब प्रगति करता है, तो उसकी प्रगति से जल कर उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वही उसके मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं। ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक... कठिन होता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता श्री राजेश नायक कहते हैं ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए :-
- प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें।
- हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाएं।
- पांच लौंग पूजा स्थान में देशी कपूर के साथ जलाएं।
- फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए।
यह प्रयोग जीवन में समस्त शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होगा, वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे।
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सांसारिक जीवन में समृद्धि व सफलता के लिए धन की चाहत अहम होती है, जिसे पूरा करने के लिए धर्म और कर्म दोनों ही तरीकों से वैभव की देवी माता लक्ष्मी को पूजने का महत्व बताया गया है।
... प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता श्री राजेश नायक कहते हैं वैभवशाली, प्रतिष्ठित व सफल जीवन के लिए बेताब इंसान को किन बुरी आदतों को छोड़ देना चाहिए इन बुरी आदतों के कारण लक्ष्मी की प्रसन्नता मुश्किल बताई गई है
- श्री नायक कहते हैं महाभारत में लिखा है कि -
षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।।
इस श्लोक मे कर्म, स्वभाव व व्यवहार से जुड़ी इन छ: आदतों से यथासंभव मुक्त रहने की सीख है
- नींद - अधिक सोना समय को खोना माना जाता है, साथ ही यह दरिद्रता का कारण बनता है। इसलिए नींद भी संयमित, नियमित और वक्त के मुताबिक हो यानी वक्त और कर्म को अहमियत देने वाला धन पाने का पात्र बनता है।
- तन्द्रा - तन्द्रा यानी ऊंघना निष्क्रियता की पहचान है। यह कर्म और कामयाबी में सबसे बड़ी बाधा है। कर्महीनता से लक्ष्मी तक पहुंच संभव नहीं।
- डर - भय व्यक्ति के आत्मविश्वास को कम करता है, जिसके बिना सफलता संभव नहीं। निर्भय व पावन चरित्र लक्ष्मी की प्रसन्नता का एक कारण है।
- क्रोध - क्रोध व्यक्ति के स्वभाव, गुणों और चरित्र पर बुरा असर डालता है। यह दोष सभी पापों का मूल है, जिससे लक्ष्मी दूर रहती है।
- आलस्य - आलस्य मकसद को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा है। संकल्पों को पूरा करने के लिए जरूरी है आलस्य को दूर ही रखें। यह अलक्ष्मी का रूप है।
- दीर्घसूत्रता - जल्दी हो जाने वाले काम में अधिक देर करना, टालमटोल या विलंब करना।
जिस घर में अनाज का सम्मान होता है, अतिथि सत्कार होता है और यथासंभव दान, गरीबों की मदद होती रहती है उस घर में लक्ष्मी निवास करती है।
- जो स्त्रियाँ पति के प्रतिकूल बोलती हैं, दूसरों के घरों में घूमने-फिरने में रुचि रखती हैं और घर के बर्तन इधर-उधर फैला या बिखेर कर रखती हैं, लक्ष्मी उनके घर नहीं आती।
- जो व्यक्ति सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोता है, भोजन करता है, दिन में सोता है, दाँत साफ नहीं करता है, अधिक भोजन करता है, वह यदि साक्षात विष्णु भी हो तो लक्ष्मी उसे छोड़कर चली जाती है।
- जो शरीर में तेल लगाकर मल-मूत्र त्यागता है या नमस्कार करता है, या पुष्प तोड़ता है, या जिसके पैर में मैल जमी होती है, उसके घर लक्ष्मी नहीं आती है।
- अपने अंगों पर बाजा बजाने से भी धनी व्यक्ति का साथ लक्ष्मी धीरे-धीरे छोड़ देती है।
- सौभाग्यशाली स्त्रियों को घुँघरू वाली पायल सदैव धारण करना चाहिए जिससे लक्ष्मी छम-छम बरसती है।
- आँवले के वृक्ष के फल में गाय, के गोबर में, शंख में, कमल में, श्वेत वस्त्र में लक्ष्मी सदैव निवास करती है।
- जिसके घर में भगवान शिव की पूजा होती है और देवता, साधु, ब्राह्मण, गुरु का सम्मान होता है। ऐसे घर में लक्ष्मी सदैव निवास करती है।
- जो स्त्री नियमित रूप से गोग्रास निकालती है और गाय का पूजन करती है उस पर लक्ष्मी की दया बनी रहती है।
- जिस घर में अनाज का सम्मान होता है, अतिथि सत्कार होता है और यथासंभव दान, गरीबों की मदद होती रहती है उस घर में लक्ष्मी निवास करती है।
- जिस घर में कमल गट्टे की माला, एकांक्षी नारियल, पारद शिवलिंग, कुबेर यंत्र स्थापित रहता है उस घर में लक्ष्मी पीढ़ियों तक निवास करती है।
- जिस घर में शुद्धता, पवित्रता रहती है और बिना सूँघे पुष्प देवताओं को चढ़ाए जाते हैं। उस घर में लक्ष्मी नित्य विचरण करती है।
- जिस घर में स्त्रियों का सम्मान होता है स्त्री पति का सम्मान और पति के अनुकूल व्यवहार करती है एवं पतिव्रता और धीरे चलने वाली स्त्री के घर में लक्ष्मी का निवास रहता है।
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शिव उपासना में बिल्वपत्र का चढ़ावा पापनाशक व सांसारिक सुखों को देने के नजरिए से बहुत अहमियत रखता है। खासतौर पर शिव भक्ति के दिनों जैसे सोमवार को बिल्वपत्र का चढ़ावा मनोरथ सिद्धि का श्रेष्ठ उपाय भी है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता श्री राजेश नायक कहते हैं शास्त्रों में शिव उपासना की नियत मर्यादाओं की कड़ी में बिल्वपत्र चढ़ाने से जुड़ी कुछ खास बातें उजागर हैं। इन नियमों में बिल्वपत्रों को कुछ खास दिनों पर ही तोडऩा व ...बिल्वपत्र न होने पर शिव पूजा का तरीके बताए गए हैं।
हिन्दू पंचांग के मुताबिक ये दिन शिव-शक्ति या गणेश उपासना के खास दिन है। बिल्ववृक्ष में शिव व शक्ति स्वरूपा देवी लक्ष्मी का वास माना गया है और शिव-शक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे माने गए हैं। श्रीगणेश भी शिव-शक्ति के पुत्र हैं। इसलिए बताया गया है कि अनजाने में यहां बताए जा रहे दिनों में बिल्वपत्र न तोड़कर देव दोष से बचना चाहिए।
श्री राजेश नायक कहते हैं किन खास दिनों पर बिल्वपत्र न तोड़े और बिल्वपत्र न होने की स्थिति में शिव पूजा में क्या उपाय करें –
इन तिथियों पर शास्त्रों के मुताबिक बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए -
- चतुर्थी
- अष्टमी
- नवमी
- चतुर्दशी
- अमावस्या
- संक्रांति (सूर्य का राशि बदल दूसरी राशि में प्रवेश)
- सोमवार
इन तिथियों पर बिल्वपत्र न होने की स्थिति में शिव पूजा में क्या उपाय करें –
श्री नायक कहते हैं चूंकि बिल्वपत्र शिव पूजा का अहम अंग है, इसलिए इन दिनों में बिल्वपत्र न तोडऩे के नियम के कारण बिल्वपत्र न होने पर नए बिल्वपत्रों की जगह पर पुराने बिल्वपत्रों को जल से पवित्र कर शिव पर चढ़ाए जा सकते हैं या इन तिथियों के पहले तोड़ा बिल्वपत्र चढ़ाएं।
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पूर्व उपप्रधानमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा भाजपा के सभी प्रमुख पदों से इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है। श्री आडवानी का जन्म 8 नवंबर 1927 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था। उनका सूर्य नीच का है एवं मंगल-बुध के साथ युति करता है। राहु मित्र राशि में है
...
अडवानी जी की बृश्चिक लग्न की जन्मकुंडली में अगस्त तक शनि की महादशा में बुध की अंतरदशा में राहू की प्रत्यंतरदशा चल रही है श्री आडवाणी की कुंडली में शनि वृश्चिक यानि की शत्रु राशि में स्थित है। मंगल के स्वामित्व वाली इस राशि में शनि का होना उनके किसी बड़े पद की आशा को निष्फल बना रहा है
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता श्री राजेश नायक कहते हैं इस समय की ग्रह स्थिति उनके राजनीतिक कद और उनके सम्मान को भी हानि पहुंचा रही है। पार्टी में उनका कद घटा रही है। उनका इस्तीफा देना कारगर नहीं होगा। पूर्व छवि के अनुसार कुछ मामूली मान-मनौव्वल के पश्चात वह झुक जाएंगे, ऐसा सितारों का इशारा है।
श्री राजेश नायक कहते हैं आने वाला 2014 में भी उनको शनि में बुध का अंतर चलेगा जो उनके और पार्टी दोनों के लिए ठीक नहीं होगा। इस बार अगर वे चुनाव में खड़े हुए तो संभव है उनके रास्ते में बहुत सी रुकावटें आएंगी। जीत का रास्ता बहुत कठीन होगा।
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बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा परंपरा हिन्दू माह आषाढ़ की पूर्णिमा तिथि से श्रावण माह की पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक है। किंतु मौसम के मुताबिक इसमें फेरबदल भी होते हैं। इस साल यह यात्रा 28 जून से शुरू होगी।
पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी की आरती और पूजा के बाद दर्शन के लिए भक्तों का आना शुरू होता है। बाबा अमरनाथ की यात्रा शुरू होते ही कुछ ही दिनों में शिव भक्ति का यह रंग और चढ़ता जाता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता श्री ...राजेश नायक कहते हैं इस गुफा में आने वाले शिवभक्तों के बीच पापमुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए हिम शिवलिंग के दर्शन का महत्व है, इस गुफा में एक ओर वजह भगवान शंकर और ईश्वरीय सत्ता का प्रत्यक्ष अनुभव कराती है। यही वजह है - इसी गुफा में रहने वाला कबूतर का एक जोड़ा।
मान्यता है कि कई युगों से ये 2 कबूतर इसी गुफा में नजर आ रहे हैं। आखिर क्या है इन 2 कबूतरों से जुड़ा रहस्य, इन कबूतरों के दर्शन कर हर भक्त खुद को सौभाग्यशाली मानता है। माना जाता है कि कबूतर का यह जोड़ा अमर है। अमर कबूतर के इस जोड़े का संबंध बाबा अमरनाथ की अमरकथा के रहस्य से जुड़ा है।
श्री नायक कहते हैं मतान्तर से अलग-अलग पौराणिक और लोक मान्यताएं हैं। जानिए कबूतरों के अमर होने के रहस्य को उजागर करती ऐसी ही एक मान्यता –
जब भगवान शंकर ने माता पार्वती के हठ करने पर अमरत्व का रहस्य उजागर करने का निश्चय किया तो वह माता पार्वती को लेकर अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचे। भगवान शंकर चाहते थे कि अमरता का रहस्य सुनाने के दौरान गुफा और उसके आस-पास कोई प्राणी मौजूद न रहे। भगवान शंकर ने अपने तेजोबल से कालाग्रि रुद्र की उत्पत्ति की। उन्होनें कालाग्रि रुद्र को आदेश दिया कि वह गुफा और गुफा के आस-पास मौजूद सभी वनस्पतियों और प्राणियों को भस्म कर दे।
कालाग्रि रुद्र ने आदेश का पालन किया, किंतु स्वयं भगवान शंकर के आसन के नीचे कबूतर का एक अंडा बच गया, जिससे वे अनजान थे। भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई। कहानी सुनने के दौरान माता पार्वती तो सो गईं, किंतु तब अंडा वहीं मौजूद था।
माना जाता है कि बाद में इसी अण्डे से जुडवां कबूतरों का जन्म हुआ, जो अमरत्व की कहानी के प्रभाव से अमर हो गए। माना जाता है कि आज भी गुफा में दिखाई देने वाले 2 कबूतर, वही अमर कबूतर का जोड़ा है।
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कुछ लोगों के साथ यह समस्या होती है कि उनके सपने में कोई मृत व्यक्ति बार-बार आता है और ऐसे सपने बहुत ही भयानक होते हैं। स्वाभाविक है कि जब कोई मृत व्यक्ति सपने में बार-बार आएगा तो डर तो लगेगा। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो उसे कुछ उपाय करना चाहिए।
...
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अंक नक्षत्र वेता राजेश नायक कहते हैं जानिए ऐसे उपाय, जिनसे कोई मृत व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, आपको कभी भी सपने में नहीं सताएगा।
जीवन में हमारे कई रिश्ते-नाते बनते हैं, कई लोगों से लगाव होता है। ऐसे में मृत्यु के बाद अक्सर प्रियजनों को मृत व्यक्ति की याद आती है, सपने में भी दिखाई देते हैं। कभी-कभी सपने में दिखाई देने वाले मृत व्यक्ति से किसी भी प्रकार का भय नहीं होता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में मृत व्यक्ति सपने में आए तो डर लगने लगता है तो उसे ये दो काम अवश्य करना चाहिए।
पहला काम है उस मृत व्यक्ति के नाम पर रामायण या श्रीमदभागवत का पाठ करना चाहिए। दूसरा काम है गरीब बच्चों को मिठाई खिलाएं। इसके साथ ही मृत व्यक्ति के नाम से विधि-विधान से तर्पण कराना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार यदि मृत्यु के बाद बार-बार सपनों में आना किसी बात की ओर इशारा होता है कि यदि मरने वाले आत्मा अतृप्त है या उसकी कोई इच्छा अधूरी रह गई है या वह अशांत है तो संबंधित व्यक्ति के सपनों में आकर संकेत देती है।
ऐसे में परिवार के सदस्यों को मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए पुण्य कर्म, दान आदि करना चाहिए। इससे वह आत्मा तृप्त होती है और उसे शांति प्राप्त होती है।
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घर में सुख-समृद्धि व आर्थिक पक्ष को लेकर समस्याएं न उत्पन्न हों, ऐसी प्रत्येक व्यक्ति की कामना होती है। यहा मैं आर्थिक सम्पन्नता देने वाली ऐसी छोटी-छोटी बातें लिख रहा हु जो अधिकांष लोगों को पता तो होती हैं, परंतु कुछ तो आलस्यवष तथा कुछ अज्ञानतावष वह उनसे मिलने वाले लाभ से वंचित रह जाते हंै। इन्हें अपनाने का कोई विषेष नियम भी नहीं है। सहज मन से कभी और किसी भी समय इन्हें प्रारंभ किया जा सकता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी व अं...क नक्षत्र वेता राजेश नायक कहते हैं अन्य उपायों की तरह इनके प्रयोग से अहित की लेषमात्र भी संभावना नहीं है। इन छोटी-छोटी बातों के लिए आत्मविष्वास परम आवष्यक है। इन उपायों के शुभ प्रभाव में विलम्ब तो अवष्य हो सकता है परंतु उनसे जब लाभ मिलना प्रारंभ होगा तो वह होगा स्थाई
- प्रातःकाल उठ कर सर्वप्रथम अपने दोनों हाथों की हथेलियों को कुछ क्षण देखकर उन्हें चूमें और उन्हें परस्पर रगड़ कर अपने चेहरे पर तीन चार बार फिराएं।
- नाक के छिद्रों में से एकाग्र होकर यह देखें कि उसका दायों स्वर चल रहा है या बायां। जो भी स्वर चल रहा हो, सर्वप्रथम उस ओर के हाथ की उंगली से धरती का स्पर्ष करके माथे से लगाएं और उसके बाद पहला स्वर चलने वाला पैर ही धरती से लगाएं।
- घर में बनने वाले खाने में से पहली रोटी गाय की निकालें।
- अपने खाने में से थोड़ा सा अंष निकाल कर कौओं अथवा अन्य पक्षीयों को डाला करे।
- रात्रि के खाने के पश्चात बचे खाने का कुछ भाग कुत्ते के नाम का निकाला करें। घर का बचा खाना नाली में न फेकें, पशु-पक्षियों को दे दिया करें।
- यदि घर में आटा गेंहॅू पीस कर उपलब्ध होता है तो आटा केवल षनिवार को ही पिसवाने का नियम बना लें। आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के लिए डाल दिया करें।
- शनिवार को खाने में किसी भी रुप में काला चना अवष्य ले लिया करें।
- जब भी मन करे चीटिंयों को चीनी मिश्रित आटा खिलाया करें। यथा संभव यह प्रयास किया करें आपके पैरों से चीटियाॅ अथवा अन्य निरीह छोटे-छोटे कीट-पतंगे कुचले न जाएं।
- घर में उपलब्ध प्रत्येक देवी-देवताओं और टंगे हुए दिवंगत आत्माओं के चित्रों पर रोली, अष्टगंध तथा अक्षत का तिलक अवष्य लगा लिया करें। अपने पूर्वजों के चित्रों पर फूलों का हार भी चढ़ाया करें।
- प्रातःकाल कुछ भी खाने से पूर्व सर्वप्रथम घर में झाड़ू़. अवष्य लगानी चाहिए।
- संध्या समय जब दोनों समय मिलते है, घर में झाड़ू़.-पोंछे का कार्य न करें।
- संध्या होने पूर्व घर का कोई भी सदस्य घर में प्रकाष अवष्य कर दिया करे।
- घर की कोई सौभाग्यषाली विवाहित स्त्री इस समय तैयार होकर प्रफुल्ल मन से देवी-देवताओं धूप-दीप दिखाया करें।
- घर से प्रातः चाहे जितनी जल्दी निकलना पड़े, बिना झाड़ू़. लगे न निकले।
- घर से बाहर जब भी किसी उद्देष्य से अथवा धन सम्बन्धी किसी कार्य को निकले निराहार मुह न निकलें। कुछ न कुछ खा अवष्य लें। निकलने से पूर्व यदि मीठा दही खाकर निकलें तो और भी सौभाग्यषाली है।
- घर की कोई स्त्री व्यक्ति को विदा करने से पूर्व नहा-धोकर स्वच्छ अवष्य हो जाए।
- किसी सुहागिन स्त्री को गुरुवार के दिन सुहाग अथवा श्रंृगार प्रसाधन देने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
- घर बाहर स्त्री का आदर करने से तथा कुआरी कन्याओं (दस वर्ष से कम आयु की) को देवी स्वरुप मान कर प्रसन्न करने से सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।
- किसी दरिद्र अथवा असहाय व्यक्ति की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर सकते है तो कर दें, उसका तिरस्कार अथवा उपहास कदापि न करें।
- किसी न किसी तरह दरिद्र, असहाय और हिजड़ों की शुभकामनाएं लिया करें।
- किसी भी अमवस्या की अर्द्धरात्रि में एक कम्बल षीत से ठिठुरते किसी भिखारी के ऊपर चुपचाप डाल कर घर लौट आएं।
- दरिद्र को यथाषक्ति भोजन और कपड़ा दान दिया करें।
- धन सम्बन्धी समस्त कार्यो के लिए सोमवार अथवा बुधवार चुना करें।
- घर के पूजास्थल में एक जटा वाला नरियल रखा करें।
- धन सम्बन्धी कार्य पर निकलने से पूर्व घर में उपलब्ध देवी-देवताओं के चित्र, मूर्ति अथवा यंत्र के दर्षन अवष्य किया करें। उन पर चढ़ाये हुए फूलों में से एक अपनी जेब में रखकर साथ ले जाया करें।
- नौकरी, व्यवसाय आदि शुभकार्यों में प्रस्थान करने से पूर्व घर कोई भी सदस्य एक मुठठी काले उड़द आपके ऊपर से धरती पर छोड़ दें, कार्य सिद्ध होगा।
- घर खाली हाथ कभी न लौटें। बिना क्रय की हुई कोई भी वस्तु घर लाने का नियम बना लें, भले ही वह राह में पड़ा हुआ कागज का टुकड़ा अथवा ऐसा ही कुछ अन्य।
- काली हल्दी मिल जाए तों घर में रख लें।
- एकाक्षी नरियल, दक्षिणवर्ती षंख, हाथ जोड़ी, सियार सिंही, बिल्ली की जेल, एक मुखी रुद्राक्ष, गोरोचन, नागकेसर, मोर के पंख, अष्टगंध आदि में श्री लक्ष्मी जी को रिझाने का विलक्षण गुण होता है। ये वस्तुएं, सुलभ हो सकें तो उन्हें ऐसे ही घर में रख लें, लक्ष्मी प्रसन्न होगीं।
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विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनैश्चर-कवच-स्तोत्र-मन्त्र
... नीलाम्बरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान्।
चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः।।१
ब्रह्मोवाच-
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।।२
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्।
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।।३
ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनंदनः।
नेत्रे छायात्मजः पातु, पातु कर्णौ यमानुजः।।४
नासां वैवस्वतः पातु मुखं मे भास्करः सदा।
स्निग्ध-कंठस्च मे कंठं भुजौ पातु महाभुजः।।५
स्कंधौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रदः।
वक्षः पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्तथा।।६
नाभिं ग्रहपतिः पातु मंदः पातु कटि तथा।
ऊरु ममांतकः पातु यमो जानुयुग्म तथा।।७
पादौ मंदगतिः पातु सर्वांगं पातु पिप्पलः।
अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेन्मे सूर्यनन्दनः।।८
फलश्रुति
इत्येतत्कवचं दिव्यं पठेत्सूर्यसुतस्य यः।
न तस्य जायते पीडा प्रोतो भवति सूर्यजः।।९
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोऽपि वा।
कलत्रस्थो गतो वापि सुप्रीतस्तु सदा शनिः।।१०
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे।
कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्।।११
इत्येतत्कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा।
द्वादशाष्टमजन्मस्थदोषान्नाशयते
जन्मलग्नस्थितान्दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभुः।।१२
।।श्रीब्रह्माण्डपुराणे ब्रह्म-नारद-संवादे शनि-वज्र-पंजर-कवचं।।
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अश्वत्थाय वरेण्याय सर्वैश्वर्यदायिने ।
अनन्तशिवरुपाय वृक्षराजाय ते नमः ।।
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हिन्दु धार्मिक मान्यता है कि शिव भक्ति से देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है। शिव को चढ़ाए जाने वाले बिल्वपत्र के वृक्ष में लक्ष्मी का वास होने या लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के शिव भक्ति में कमल (कमल पर बैठने से देवी लक्ष्मी कमला भी पुकारी जाती हैं) चढ़ाने की पौराणिक मान्यताएं शिव पूजा से पैसा व सौभाग्य की चाहत पूरी होने की अहमियत बतातीं हैं।
इनके लिए शिव उपासना के कुछ सरल उपाय भी शास्त्रों में बताए गए हैं। ये छोटे-छोटे उपाय शिव उपासना के... खास दिन जैसे सोमवार आदि पर करना पैसा की कमी और दरिद्रता को दूर करने में असरदार माने गए हैं।
- जानिए एक ऐसा ही धनलाभ देने वाला चमत्कारी उपाय -
- सुबह स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल की धारा अर्पित कर गंध, चंदन लगाएं।
- बाद धन लाभ की कामना से खासतौर पर शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ये चावल अखण्डित यानी पूरे होना चाहिए।
- शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर पहले वस्त्र चढ़ाकर उस पर नीचे लिखा वैदिक मंत्र बोल पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ चावल समर्पित करें –
नम: शम्भवाय च मयोभवाय च
नम: शंकराय च मयस्कराय च
नम: शिवाय च शिवतराय च ।।
- इसके बाद शिव पर गंध, कमल का फूल, शिव को प्रिय धतूरा, नारियल और बिल्वपत्र चढ़ाएं। नैवेद्य लगाकर शिव आरती करें और सुख-संपत्ति की प्रार्थना करें।
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हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष को देवों का देव कहा गया है। स्वयं कृष्ण ने गाती में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं। जिसने भी इस वृक्ष की सेवा श्रद्धा भाव से की है, उसे लाभ की अनुभूति अवश्य हुयी है।
पीपल के वृक्ष की प्रत्येक शनिवार को (दूध, जल, शक्कर, शहद, काले तिल, गंगा जल और गुड़ इन सभी चीजों को जल में मिलायें) तत्पश्चात यह मीठा जल पीपल वृक्ष पर चढ़ायें। और आटा का दीपक जलाकर उसमें सरसों का तेल, एक लोहे की कील व 11 साबुत उड़त... के दाने डालकर धूप दीप क साथ आर्पित करें।
बायें हाथ से पीपल के वृक्ष की जड़ को स्पर्श कर अपने माथें में लगायें 11 बार परिक्रमा करें। यह उपाय करने से कुछ ही समय पश्चात आपको शनिदेव की कृपा मिलने लगेगी।
- इस उपाय को करने से निम्न प्राकर की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी
- शत्रु से परेशान हैं यदि आपको शत्रु अधिक परेशान कर रहें है, तो :- आप उपरोक्त उपाय के साथ-पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होगा।
- दु:खों से ग्रसित हो कन्या यदि किसी कन्या की पत्री में प्रबल वैधव्य योग हो तो उसे उपरोक्त उपाय को कम से कम 1 वर्ष तक करने से लाभ अवश्य प्राप्त होगा।
- अगर बृहस्पति मजबूत नहीं हो देव गुरू बृहस्पति की अशुभता समाप्त करने के लिए केले के वृक्ष के साथ पीपल के वृक्ष की भी निममित सेवा करें तो लाभ होगा।
- किसी विशेष कार्य के लिये यदि आपको कोई विशेष कार्य सिद्ध करना है, तो शानिवार के दिन उपरोक्त उपाय करने से पूर्व अपना कार्य होने का निवेदन कर पीपल वृक्ष के समक्ष मिटटी में एक बड़ी लोहे की कील गाड़ दें और कार्य सिद्ध होने के पश्चात निकाल दें।
- शरीर में दर्द रहता है यदि आपको हाथ-पैरों में अथवा कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है तो आप काले कपड़े में पीपल के वृक्ष की जड़ व लकड़ी को रखकर अपने बिस्तर के सिरहाने रख लें और साथ में पीपल वृक्ष की सेवा करते रहें। कुछ समय बाद आप दर्द से मुक्त हो जायेंगे।
- निरंतर हानि हो रही है यदि आपको निरन्तर हानि उठानी पड़ रहीं है तो प्रत्येक शनिवार को पीपल के एक नया पत्ते पर ऊँ लिखकर उस पत्ते को पीपल की लकड़ी के साथ धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय कम से कम 8 शनिवार तक करना होगा। कुछ समय में ही आपको लाभ होने लगेगा।
- जीवन में समस्याएं यदि आप किसी क्षेत्र में सफल होना चाहते है अथवा आपके कार्यों में बाधायें आ रही है, तो आप शनिवार के दिन काले धागे में पीपल के 8 पत्तों को एक गांठ में एक साथ बांधें। अगले शनिवार को जब नई गांठ बांधे तो पहली वाली गांठ को उतार कर बहते हुये जल में प्रवाहित कर दें। आप बाधाओं से मुक्त हो जायेंगे।
- शिवलिंग का पूजन प्रथम सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे शिव प्रतिमा अथ्वा शिवलिंग को रख कर नियमित ऊँ नमः शिवाय का जाप कर जल से आभिषेक करें। आपके परिवार में सुख व समृद्धि की बयार बहती रहेगी।
Astrologer .. Rajesh Nayak
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क्या आप जानते हैं देवताओं के धन की रक्षा करने वाले कुबेर देव राक्षसराज लंकाधिपति रावण के सोतेले भाई हैं। कुबेर देव की विधि-विधान से की गई पूजा किसी भी दरिद्र को धनवान बना सकती है। कुबेर देव से जुड़ी कुछ खास उपाय जिन्हें अपनाने पर आपकी पैसों की समस्या दूर हो सकती है।
शास्त्रों के अनुसार कुबेर देव पूर्व जन्म में चोर थे। वे मंदिरों की धन-संपदा भी चोरी किया करते थे। ऐसे ही एक रात वे भगवान शिव के मंदिर में चोरी करने पहुंचे। वहा...ं उस समय रात होने के कारण काफी अंधेरा था। अंधेरे में उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहता था तब उन्होंने चोरी करने के लिए एक दीपक जलाया। दीपक के प्रकाश में उन्हें मंदिर की धन संपत्ति साफ-साफ दिखाई देने लगी। कुबेर मंदिर का सामान चोरी कर ही रहे थे कि हवा से दीपक बुझ गया।
उन्होंने पुन: दीपक जलाया, थोड़ी देर फिर हवा से दीप बुझ गया और कुबेर ने पुन: दीया प्रज्जवलित कर दिया। यह प्रक्रिया कई बार हुई। रात के समय शिवजी के समक्ष दीपक लगाने पर उनकी असीम कृपा प्राप्त हो जाती है। कुबेर यह बात नहीं जानते थे लेकिन रात के समय बार-बार दीपक जलाने से भोलेनाथ कुबेर से अति प्रसन्न हो गए।
कुबेर देव द्वारा अनजाने में की गई इस पूजा के फलस्वरूप महादेव ने उन्हें अगले जन्म में देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया। तभी से कुबेर देव महादेव के परमभक्त और धनपति हो गए। कुबेर भगवान शिव के परमप्रिय सेवक भी हैं। धन के अधिपति होने के कारण इन्हें मंत्र साधना से प्रसन्न किया जा सकता है।
इनकी प्रसन्नता जिस भक्त को मिल जाती है वह धनवान हो जाता है। कुबेर मंत्र का जप दक्षिण की ओर मुख करके करना चाहिए।
कुबेर मंत्र :-
ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:।
विनियोग- अस्य श्री कुबेर मंत्रस्य विश्वामित्र ऋषि:बृहती छन्द: शिवमित्र धनेश्वरो देवता समाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोग:
हवन- तिलों का दशांस हवन करने से प्रयोग सांग होता है। यह प्रयोग शिव मंदिर में करना उत्तम रहता है। यदि यह प्रयोग बिल्वपत्र वृक्ष की जड़ों के समीप बैठकर हो सके तो अधिक उत्तम होगा। यह उपाय सूर्योदय के पूर्व सम्पन्न हो सके तो बहुत लाभकारी होता है।
जीवन में धन, सुख और समृद्धि बढ़ाने के लिए धर्म शास्त्रों के अनुसार कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय यह है कि घर में कुबेर देव की मूर्ति या फोटो अवश्य रखना चाहिए कुबेर देव की मूर्ति या फोटो घर में लगाने से इनकी कृपा सदैव सभी सदस्यों पर बनी रहती है और धन से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
कुबेर देव का निवास उत्तर दिशा की ओर माना गया है। अत: इनका फोटो भी घर में उत्तर दिशा की ओर ही लगाना श्रेष्ठ रहता है। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि जहां इनका चित्र लगाया जाए वह स्थान पवित्र हो। वहां किसी प्रकार का पुराना सामान या कबाड़ा न हो। उस जगह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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